- भूकंप या जहाजों से इन महत्वपूर्ण केबलों को नुकसान हो सकता है।
Submarine Cable: आज हम इंटरनेट को मोबाइल या वाई-फाई से जुड़ा मानते हैं लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. जब आप किसी दूसरे देश की वेबसाइट खोलते हैं या विदेश में बैठे किसी व्यक्ति से वीडियो कॉल करते हैं तो यह डेटा आसमान से नहीं बल्कि समंदर की गहराई से होकर गुजरता है.
क्या होती हैं अंडरसी केबल?
दुनिया भर के देशों को जोड़ने के लिए समुद्र के नीचे बेहद खास केबल बिछाई जाती हैं जिन्हें अंडरसी केबल या सबमरीन केबल कहा जाता है. ये केबल फाइबर ऑप्टिक तकनीक पर काम करती हैं जिनके अंदर बेहद पतले ग्लास फाइबर होते हैं. इन्हीं के जरिए डेटा लाइट सिग्नल के रूप में हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचता है.
ये केबल बनती कहां हैं?
इन खास केबल्स को बनाने का काम दुनिया की कुछ चुनिंदा कंपनियां ही करती हैं. इनमें SubCom, Alcatel Submarine Networks और NEC Corporation जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन केबल्स को हाई-टेक फैक्ट्रियों में तैयार किया जाता है जहां हर लेयर को बेहद सावधानी से बनाया जाता है. एक केबल में सिर्फ फाइबर ही नहीं होता बल्कि उसके ऊपर कई परतों में स्टील, कॉपर और इंसुलेशन लगाया जाता है ताकि यह समुद्र के दबाव, पानी और बाहरी खतरों से सुरक्षित रह सके.
समुद्र में कैसे बिछाई जाती हैं केबल?
इन केबल्स को साधारण तरीके से नहीं बल्कि खास जहाजों की मदद से समुद्र के अंदर बिछाया जाता है. पहले पूरे रूट का सर्वे किया जाता है फिर केबल को धीरे-धीरे समुद्र की तलहटी पर फैलाया जाता है. कुछ जगहों पर इसे जमीन के अंदर भी दबाया जाता है ताकि यह मछली पकड़ने वाले जाल या जहाजों के एंकर से सुरक्षित रहे.
क्या कभी इंटरनेट बंद हो सकता है?
समुद्र के अंदर बिछी ये केबल काफी मजबूत होती हैं लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं. कई बार भूकंप, जहाजों के एंकर या यहां तक कि शार्क के काटने से भी ये केबल क्षतिग्रस्त हो सकती हैं. हालांकि ऐसी घटनाएं कम होती हैं और कंपनियां तुरंत इन्हें ठीक करने के लिए टीम भेजती हैं.
क्यों जरूरी हैं ये केबल?
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का करीब 95% इंटरनेट डेटा इन्हीं अंडरसी केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है. सैटेलाइट इंटरनेट भी मौजूद है लेकिन वह इतना तेज और भरोसेमंद नहीं होता. समंदर के नीचे बिछी ये केबल्स आधुनिक दुनिया की लाइफलाइन हैं. भले ही हमें ये दिखाई नहीं देतीं लेकिन हमारी रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी इन्हीं पर टिकी हुई है.
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