- एआई-पावर्ड साइबर हमले बढ़े; माइक्रोसॉफ्ट ने प्रोजेक्ट परसेप्शन लॉन्च किया।
- यह एआई एजेंटिक सिस्टम खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया देगा, सिर्फ अलर्ट नहीं।
- इसमें तीन एआई टीमें खामियां ढूंढकर खुद-ब-खुद ठीक करेंगी, लगातार सीखेंगी।
- यह सिस्टम पूरे डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा करेगा, इंसानी निगरानी में चलेगा।
Microsoft Project Perception: एआई आने के बाद साइबर सिक्योरिटी को लेकर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. एआई की मदद लेकर हैकर्स ऐसे अटैक्स को अंजाम दे रहे हैं, जिन्हें रोकना काफी मुश्किल हो गया है. इंडिविजुअल यूजर्स के साथ-साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों भी इन चुनौतियों से नहीं बच पाई हैं. इन अटैक्स का सामना करने के लिए इंसानी तरीके पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं और अब इनके लिए एआई को ही ढाल बनाया जाएगा. अब माइक्रोसॉफ्ट इसके लिए Project Perception लेकर आ रही है. आइए जानते हैं कि यह प्रोजेक्ट क्या है और कैसे एआई से होने वाले साइबर अटैक से बचा सकता है.
क्या है माइक्रोसॉफ्ट का Project Perception?
Project Perception एआई एजेंटिक सिक्योरिटी सिस्टम है. यह उसी स्पीड से रिएक्ट करेगा, जिस गति से थ्रेट आ रहा होगा. यह सिस्टम सिर्फ सिक्योरिटी टीम्स को अलर्ट नहीं भेजेगा. थ्रेट डिटेक्ट होते ही यह खुद सोचना शुरू कर देगा और एआई की मदद से लगातार उस पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर एक्शन भी ले सकेगा. यह एक सिस्टम पर काम करने की बजाय कंपनी के सारे डिजिटल नेटवर्क पर काम करेगा.
कैसे काम करेगा Project Perception?
इस सिस्टम में तीन तरह के एआई एजेंट काम करेंगे. रेड टीम के एजेंट सिस्टम की उन खामियों को ढूंढेंगे, जिनका अटैकर्स फायदा उठा सकते हैं. इसके बाद ब्लू टीम का रोल आएगा. ये एजेंट खामियों को पहचान कर यह पता लगाएंगे कि इनमें चिंता की बात क्या है. फिर ग्रीन टीम के एजेंट अपना काम शुरू कर उन खामियों को फिक्स कर देंगे. ये तीनों टीम लूप में काम करती रहेगी और समय के साथ-साथ इनकी लर्निंग बढ़ती जाएगी. इससे सिस्टम को पूरी सिक्योरिटी मिल पाएगी और यह सारा काम इंसानी की देखरेख में होगा. इंसान के पास ही फाइनल डिसिजन लेने का राइट होगा.
माइक्रोसॉफ्ट को क्यों है इस सिस्टम को भरोसा?
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि यह सिस्टम डिवाइस, ऐप्स, डेटा और क्लाउड सिस्टम पर नजर रख सकता है. फिर इसे जो चीजें नजर आएंगी, ये उनके आधार पर एक्शन भी ले सकेगा. इसे जब मल्टी-मॉडल सेटअप से मिला दिया जाएगा तो यह हर काम के लिए अलग-अलग एआई मॉडल को सेलेक्ट कर सकेगा. इसका फायदा यह होगा कि एक ही एआई मॉडल को सारा काम नहीं करना पड़ेगा. माइक्रोसॉफ्ट ने इस सिस्टम को अपने नए साइबर स्टैक पर तैयार किया है. यह एक चैन है, जो सिग्नल को कॉन्टेक्स्ट में बदल देती है. फिर इस कॉन्टेक्स्ट को मॉडल और एजेंट के पास भेजा जाता है, जो एक्शन लेते हैं. ये सारी चीजें मिलकर एक भरोसेमंद सिक्योरिटी लेयर प्रदान कर सकती हैं.
साइबर हमलों में ऐसे यूज हो रही है एआई
साइबर अटैकर्स एआई की मदद से किसी सिस्टम की खामी का पता लगाने से लेकर पूरे अटैक को अंजाम देने समेत सारे काम कर रहे हैं. सबसे पहले किसी भी सिस्टम की खामी को ढूंढा जाता है. एआई आने के कारण अब यह काम आसान और तेज हो गया है. इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दूसरे पब्लिक सोर्स से टारगेट के बारे में जानकारी जुटाई जाती है. इन जानकारी को एआई से एनालाइज कर पर्सनलाइज और रेलिवेंट मैसेज तैयार किए जाते हैं, जिनसे फिशिंग और दूसरे अटैक्स की शुरुआत होती है.
कितने टाइप के होते हैं एआई पावर्ड साइबर अटैक
एआई ड्रिवन फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग अटैक- इनमें ह्यूमन बिहैवियर को मैनिपुलेट कर इंफोर्मेशन कलेक्ट की जाती है. ऐसे अटैक्स में वॉइस क्लोन आदि की मदद ली जाती है.
डीपफेक- धोखाधड़ी के लिए एआई से बने एकदम असली जैसी दिखने वाले नकली वीडियो का सहारा लिया जा रहा है.
एडवर्सियल एआई- यइसमें अटैकर्स मिसइंफोर्मेशन या मैनिपुलेशन के जरिए एआई की परफॉर्मेंस और एक्युरेसी को डिसरप्ट कर सकते हैं.
रैंसमवेयर- एआई रैंसमवेयर ऐसे रैंसमवेयर होते हैं, जो एआई की मदद से अपनी परफॉर्मेंस को इम्प्रूव करते रहते हैं और डिफेंस से बचने के तरीके खुद से ही सोच लेते हैं. इसलिए इनसे बचना काफी मुश्किल हो जाता है.
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