AI Chatbot Limitation: ज्यादातर लोग अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग एआई चैटबॉट्स यूज करते हैं. Claude को कई लोग रिसर्च के लिए अच्छा मानते हैं तो जनरल यूज के लिए ChatGPT को प्रेफर किया जाता है. अब एक स्टडी में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. स्टडी में कहा गया है कि वो चाहे गूगल का जेमिनी हो, एंथ्रोपिक का Claude हो या मेटा का Llama, ये अलग-अलग होने के बावजूद एक जैसा ही सोचते हैं. जब इनको कुछ क्रिएटिव काम करने को कहा जाता है तो ये एक ही तरह के कॉन्सेप्ट के सहारे आगे बढ़ते हैं. इससे यूजर की क्रिएटिविटी को खतरा बढ़ गया है.
क्या है AI Chatbot की Limitations?
इंजीनियरिंग ऐप्लिकेशन्स ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में पब्लिश हुई स्टडी में बताया गया है कि बड़ी कंपनियों के अलग-अलग मॉडल एक ही तरह से सोचते हैं. हर मॉडल को यूज करते समय रिस्पॉन्स अलग और काम का लग सकता है, लेकिन गौर से देखने पर अलग ही पैटर्न नजर आता है. ये मॉडल अधिकतर प्रॉम्प्ट्स के ऐसे रिस्पॉन्स देते हैं, जो एक जैसे होते हैं. स्टडी में रिसर्चर ने इंसानों और एआई मॉडल्स को कुछ क्रिएटिव टेस्ट दिए थे. रिजल्ट में पता चला कि एआई मॉडल्स की तुलना में इंसानों के आइडिया की रेंज ज्यादा थी.
20 से ज्यादा एआई मॉडल किए गए टेस्ट
स्टडी में रिसर्चर ने अलग-अलग कंपनियों के 20 से ज्यादा मॉडल्स को 100 लोगों के अगेंस्ट टेस्ट किया था. एआई मॉडल से मिले रिस्पॉन्स की रेंज इंसानी आइडिया से कम थी. जब इनमें समानता देखी गई तो एआई मॉडल के जवाबों में ज्यादा यूनिफॉर्मिटी देखी गई, जबकि इंसानों के रिस्पॉन्स बहुत वाइड थे. रिस्पॉन्स के साथ-साथ टास्क में भी ऐसा ही देखा गया. एआई मॉडल एक जैसी स्ट्रक्चर और रिपीटेड फ्रेजिंग को यूज कर रहे थे. जब एआई सिस्टम को क्रिएटिविटी का यूज करने को कहा गया तो रिजल्ट थोड़ा बदला, लेकिन फिर भी इंसानों के बराबर नहीं आ पाया.
लोगों की क्रिएटिविटी को इससे कैसे खतरा?
जब आप पर्सनल काम के लिए एआई को यूज कर रहे हैं तो इसके रिस्पॉन्स इंप्रैसिव लग सकते हैं और कई मामलों में इंसानी सोच से बेहतर जवाब भी मिल सकते हैं, लेकिन जब इसे बड़े स्तर पर यूज किया जाता है तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है. इसकी वजह यह है कि जब अलग-अलग लोग किसी एक ही टूल को यूज करेंगे तो इसके पैटर्न उभरकर सामने आएंगे, जिससे अलग-अलग लोगों को भी एक जैसे ही आईडियाज मिलेंगे.
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