नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इसके खतरों को लेकर चिंता भी दुनिया भर में गहराती जा रही है. अब इस बहस में ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें ने भी खुलकर चेतावनी दी है. वेटिकन सिटी से जारी अपने नए घोषणापत्र ‘मैग्नीफिका ह्यूमैनिटास’ में पोप ने साफ कहा है कि अगर एआई तकनीक इंसानी मूल्यों के बजाय सिर्फ ताकत, नियंत्रण और मुनाफे के लिए इस्तेमाल की गई, तो यह दुनिया को नए संघर्षों और विनाश की तरफ धकेल सकती है.
पोप ने खास तौर पर OpenAI के चैटजीपीटी, Anthropic के क्लाउड और Google के जेमिनी जैसे आधुनिक एआई मॉडल्स का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक अपने आप में बुरी नहीं होती, लेकिन इसे इस्तेमाल करने वालों की सोच ही तय करती है कि इसका असर इंसानियत पर कैसा पड़ेगा. उनका मानना है कि आज दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एआई इंसानी जिंदगी को आसान भी बना सकता है और अगर नियंत्रण से बाहर हुआ तो बेहद खतरनाक भी साबित हो सकता है.
मुनाफे की दौड़ में इंसानियत खोने का खतरा
पोप ने चेतावनी दी कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां एआई को सिर्फ बिजनेस और ताकत बढ़ाने के औजार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने इसे ‘बेबेल सिंड्रोम’ बताया, जहां इंसान धीरे-धीरे सिर्फ डाटा और आर्थिक आंकड़ों में बदलता जा रहा है. उनका कहना है कि अगर इंसान की गरिमा और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया गया, तो समाज में असमानता और शोषण तेजी से बढ़ेगा.
युद्ध में एआई के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता
पोप की सबसे बड़ी चिंता सेना और युद्ध में एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर है. उन्होंने साफ कहा कि जिंदगी और मौत जैसे फैसले कभी भी मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते. कोई भी एल्गोरिदम यह तय नहीं कर सकता कि किसकी जान जाए और किसकी बचे. उनका मानना है कि एआई आधारित हथियार इंसानी संवेदनशीलता को खत्म कर सकते हैं और युद्ध को पहले से ज्यादा खतरनाक बना सकते हैं.
मशीनें नहीं समझ सकती इंसानी दर्द
पोप ने कहा कि जब रिमोट सिस्टम और एआई आधारित ड्रोन दूर बैठकर हमले करते हैं, तो आम नागरिकों के दर्द और तबाही को महसूस करने वाला कोई नहीं होता. इससे इंसान की नैतिक जिम्मेदारी खत्म होने लगती है. उन्होंने सरकारों से अपील की कि ऐसे हथियारों और स्वचालित युद्ध प्रणालियों पर सख्त वैश्विक नियम बनाए जाएं.
एआई कभी पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होता
घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि एआई को पूरी तरह न्यूट्रल मानना गलत है. एआई वही सोच और प्राथमिकताएं दिखाता है, जो उसे बनाने वाली कंपनियां और डेवलपर्स उसमें डालते हैं. अगर डेटा या एल्गोरिदम में पक्षपात होगा, तो नौकरियों, शिक्षा, बैंक लोन और सरकारी सेवाओं में भी भेदभाव बढ़ सकता है.tech
टेक कंपनियों के बढ़ते नियंत्रण पर सवाल
पोप ने चिंता जताई कि दुनिया की कुछ चुनिंदा टेक कंपनियों के हाथों में एआई और डेटा का बहुत बड़ा नियंत्रण पहुंच चुका है. इससे भविष्य में समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर इन कंपनियों का असर और ज्यादा बढ़ सकता है. उन्होंने सरकारों से अपील की कि एआई सेक्टर पर मजबूत निगरानी और पारदर्शी नियम लागू किए जाएं ताकि तकनीक इंसानियत के खिलाफ हथियार न बन जाए.
तकनीक का विरोध नहीं, जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी
पोप लियो ने यह भी साफ किया कि वे तकनीक या एआई के विरोधी नहीं हैं. उनका कहना है कि एआई में शिक्षा, स्वास्थ्य, रिसर्च और समाज की बेहतरी के लिए अद्भुत संभावनाएं हैं. लेकिन यह तभी संभव है जब इंसान तकनीक को कंट्रोल करे, न कि तकनीक इंसान को नियंत्रित करने लगे. इसी वजह से उन्होंने दुनिया भर की सरकारों और समाज से मिलकर एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए सख्त नियम बनाने की अपील की है.
नई तरह की गुलामी
पोप ने कहा कि एआई की चमकदार दुनिया के पीछे एक ऐसी कड़वी सच्चाई छिपी हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक, एआई सिस्टम्स को चलाने और उनसे जुड़े डिवाइसेज बनाने वाले लाखों मजदूर आज “नई तरह की गुलामी” झेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि कंप्यूटर, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर्स को लगातार चलाए रखने की कीमत दुनिया के गरीब और कमजोर लोग अपने शरीर और जिंदगी से चुका रहे हैं. पोप ने खासतौर पर उन बच्चों और किशोरों की हालत पर चिंता जताई जो दुनिया के कई हिस्सों में बेहद खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ मिनरल्स निकालने वाली खदानों में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, ताकि एआई और आधुनिक टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का पहिया चलता रहे.