5G से 20 गुना तेज, जापान के वैज्ञानिकों ने बनाया पहला 6G डिवाइस, स्पीड जानकर उड़ जाएंगे होश


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नई दिल्ली. जापान की तोकोशिमा यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक टीम ने 6G टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रोफेसर ताकेशी यासुई की टीम ने 560 GHz फ्रीक्वेंसी पर 112 Gbps की वायरलेस स्पीड हासिल की है. इसे 5G से करीब 20 गुना तेज माना जा रहा है. भले ही दुनिया में इससे ज्यादा स्पीड का रिकॉर्ड पहले बन चुका हो, लेकिन जापान की यह उपलब्धि खास मानी जा रही है क्योंकि यह बहुत हाई फ्रीक्वेंसी टेराहर्टज बैंड पर हासिल की गई है. यही बैंड भविष्य के 6G नेटवर्क का आधार माना जा रहा है.

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जापान के वैज्ञानिकों ने बनाया पहला 6G डिवाइस, स्पीड जानकर उड़ जाएंगे होशZoom

प्रोफेसर ताकेशी यासुई की टीम ने 112 Gbps की वायरलेस स्पीड हासिल करने का दावा किया है. (AI)

नई दिल्ली. जापान एक बार फिर दुनिया को यह दिखाने में जुटा है कि अगली टेक्नोलॉजी रेस में वह पीछे नहीं रहने वाला. जहां पूरी दुनिया अभी 5G नेटवर्क को पूरी तरह फैलाने में लगी है, वहीं जापान के वैज्ञानिक 6G की तैयारी में काफी आगे निकल चुके हैं. इसी दिशा में अब तोकोशिमा यूनिवर्सिटी ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने टेक दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है

प्रोफेसर ताकेशी यासुई की टीम ने 112 Gbps की वायरलेस स्पीड हासिल करने का दावा किया है. यह स्पीड इतनी तेज है कि करीब 14 GB डेटा सिर्फ 1 सेकंड में ट्रांसफर किया जा सकता है. यानी एक बड़ी HD मूवी कुछ ही सेकंड में डाउनलोड हो सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह टेस्ट टेराहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड पर किया गया, जिसे भविष्य के 6G नेटवर्क की असली नींव माना जा रहा है.

तीन चार सेकंड में डाउनलोड होगी पूरी फिल्म

112 Gbps की स्पीड का मतलब आम लोगों की भाषा में समझें तो यह मौजूदा 5G नेटवर्क से करीब 20 गुना तेज है. आज जहां बड़ी फाइल डाउनलोड करने में कई सेकंड या मिनट लग जाते हैं, वहीं 6G टेक्नोलॉजी के जरिए यह काम लगभग तुरंत हो सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस स्पीड पर करीब 5 GB की HD मूवी सिर्फ 3 से 4 सेकंड में डाउनलोड हो सकती है.

560 GHz फ्रीक्वेंसी पर मिली बड़ी सफलता

इस उपलब्धि को सिर्फ स्पीड की वजह से खास नहीं माना जा रहा. असली कारण वह फ्रीक्वेंसी है जिस पर यह टेस्ट हुआ. जापान की टीम ने 560 GHz फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया, जो टेराहर्टज बैंड का हिस्सा है. इस तरह की हाई फ्रीक्वेंसी पर सिग्नल बहुत तेजी से कमजोर हो जाते हैं, इसलिए वहां स्थिर और तेज डेटा ट्रांसफर हासिल करना बेहद मुश्किल माना जाता है. यही वजह है कि टेक एक्सपर्ट्स इस उपलब्धि को 6G की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं. यह दिखाता है कि भविष्य में टेराहर्टज बैंड पर भी प्रैक्टिकल वायरलेस कम्युनिकेशन संभव हो सकता है.

क्या जापान ने दुनिया का पहला 6G रिकॉर्ड बनाया

दुनिया में इससे पहले भी 6G स्पीड पर कई बड़े टेस्ट हो चुके हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने 938 Gbps तक की वायरलेस स्पीड हासिल की थी. चीन की पर्पल माउंटेन लैब्स भी 206 Gbps स्पीड का टेस्ट कर चुकी है. लेकिन जापान की उपलब्धि अलग इसलिए मानी जा रही है क्योंकि उसने बहुत ज्यादा हाई फ्रीक्वेंसी पर यह टेस्ट किया. UK का रिकॉर्ड 300 GHz के आसपास था, जबकि जापान ने 560 GHz पर सफलता हासिल की. टेक्नोलॉजी की दुनिया में यह अंतर बहुत बड़ा माना जाता है.

2030 तक शुरू हो सकता है 6G दौर

फिलहाल यह टेस्ट सिर्फ लैब के अंदर छोटी दूरी पर हुआ है. इसे अभी कमर्शियल डिवाइस नहीं माना जा सकता. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि दुनिया में 6G नेटवर्क का असली रोलआउट 2030 के आसपास शुरू हो सकता है. जापान सरकार पहले ही 6G रिसर्च के लिए करीब 4.5 बिलियन डॉलर का फंड जारी कर चुकी है. अमेरिका, चीन, यूरोप और दक्षिण कोरिया भी इस रेस में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. आने वाले सालों में 6G सिर्फ इंटरनेट स्पीड ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि होलोग्राफिक कॉल्स, ऑटोमैटिक सिस्टम्स, स्मार्ट फैक्ट्रियां और अल्ट्रा एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नेटवर्क जैसी टेक्नोलॉजी को भी नई ताकत देगा.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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