अब बच्चों के लिए होगा अलग SIM Card! सुरक्षित इंटरनेट को लेकर इस देश ने लिया फैसला


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  • ऑनलाइन सट्टेबाजी, गेमिंग व अन्य खतरों से बचाव होगा।

Child SIM Card: डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों को देखते हुए Egypt सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही है. साल 2026 के मध्य तक देश में एक खास चाइल्ड SIM कार्ड लॉन्च करने की तैयारी है जिसमें इंटरनेट इस्तेमाल को सुरक्षित और नियंत्रित बनाने के लिए कई खास फीचर्स दिए जाएंगे.

क्या होगा इस चाइल्ड SIM में खास?

Daily News Egypt की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए SIM कार्ड में बच्चों के लिए सुरक्षित इंटरनेट पैकेज उपलब्ध होंगे. साथ ही इसमें पैरेंटल कंट्रोल जैसी सुविधाएं होंगी जिससे माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रख सकेंगे. इसके अलावा उम्र के आधार पर सोशल मीडिया एक्सेस को सीमित किया जाएगा ताकि बच्चे केवल उनकी उम्र के हिसाब से सही कंटेंट ही देख सकें.

सरकार बना रही है नया कानूनी ढांचा

यह पहल सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ा कानूनी और नीतिगत ढांचा तैयार किया जा रहा है. सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक व्यापक कानून पर काम कर रही है जिसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा. इस योजना में टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर फिक्स्ड इंटरनेट कंट्रोल सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है जिससे कंटेंट को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जा सके और डिवाइस स्तर पर ही कंट्रोल संभव हो.

सरकार की प्राथमिकता

देश के नेतृत्व ने साफ किया है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों से निपटना बेहद जरूरी है. सरकार का लक्ष्य ऐसा ऑनलाइन वातावरण तैयार करना है जहां बच्चे सुरक्षित रह सकें और समाज के मूल्यों की रक्षा भी हो सके. इसी दिशा में तेजी से कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है ताकि इसे संबंधित विभागों के साथ साझा कर जल्द लागू किया जा सके.

ऑनलाइन खतरों पर सख्ती

इस पहल के तहत कई गंभीर मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. जैसे ऑनलाइन सट्टेबाजी, वीडियो गेम्स के जरिए नकली करेंसी का प्रसार और डिजिटल एडिक्शन. सरकार इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए भी नियम तय करने की योजना बना रही है ताकि बच्चों को इन खतरों से दूर रखा जा सके. प्रस्तावित नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी कई सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे.

इनमें उम्र की पुष्टि (Age Verification), पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट की स्पष्ट श्रेणीकरण शामिल होगा. इसके अलावा कंपनियों को नियमित रिपोर्ट देना, यूजर्स की शिकायतों के समाधान के लिए सिस्टम बनाना और जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा.

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