
बता दें कि बारिश के मौसम में हवा में नमी काफी बढ़ जाती है. अब ज्यादा नमी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के अंदर मौजूद सर्किट और बैटरी के परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती हैं. वहीं लगातार बदलता तापमान भी लिथियम-आयन बैटरी की ताकत पर असर डालता है. ऐसे माहौल में बैटरी उतनी सही तरीके से काम नहीं कर पाती है जितना ये ड्राई मौसम में करती है.

इसके अलावा अक्सर देखा गया है कि बारिश के मौसम में लोगों के फोन में नेटवर्क की समस्या देखने को मिलती है. ऐसी स्थिति में फोन लगातार नेटवर्क खोजता रहता है जिससे फोन की बैटरी पर एक्सट्रा दवाब पड़ता है. इस पूरे प्रोसेस में फोन का प्रोसेसर और बैटरी दोनों एनर्जी खपत करते हैं जिससे बैटरी कम चलती है.

वहीं, मानसून में अक्सर रोशनी कम होती है. ऐसे में कई यूजर्स स्क्रीन की ब्राइटनेस बढ़ा देते हैं ताकि डिस्प्ले साफ दिखाई दे. बता दें कि हाई ब्राइटनेस सबसे ज्यादा फोन की बैटरी खत्म करने का काम करती है. इसके अलावा मौसम, लोकेशन, क्लाउड सिंक और अन्य बैकग्राउंड ऐप्स लगातार चलते रहते हैं जिससे बैटरी पर एक्सट्रा दबाव पड़ता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बारिश के मौसम में अगर फोन या चार्जिंग पोर्ट में नमी चली जाए तो चार्जिंग की स्पीड धीमी हो सकती है या फोन चार्जिंग रोक भी सकता है. कई स्मार्टफोन नमी का पता चलते ही सेफ्टी के लिए चार्जिंग बंद कर देते हैं. ऐसे में अगर आपका फोन गीला है तो उसे चार्जिग पर लगाने की गलती न करें.

बरसात के मौसम में भी आप अपनी बैटरी को लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए स्क्रीन ब्राइटनेस को ऑटो मोड पर रखें. जरूरत न होने पर ब्लूटूथ, GPS और 5G जैसी सर्विसेज को बंद रखें. इसके अलावा बैकग्राउंड में चल रहे बेकार के ऐप्स को बंद करें. कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर एयरप्लेन मोड का इस्तेमाल करें.
Published at : 18 Jul 2026 08:58 AM (IST)