Telegram बना नया डार्क वेब, साइबर अटैक में हो रहा यूज, सरकार ने लगाए बड़े आरोप


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  • सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में टेलीग्राम को नया डार्क वेब बताया।
  • अपराधी, कट्टरपंथी समूह इसका उपयोग कानून से बचने को कर रहे हैं।
  • साइबर फ्रॉड, ड्रग ट्रैफिकिंग, बच्चों का शोषण जैसे अपराध हो रहे।
  • सरकार ने बताया, टेलीग्राम की प्राइवेसी अपराधियों की पहचान छिपाती है।

Telegram Ban In India: टेलीग्राम को बैन करने के कुछ दिन बाद ही सरकार ने इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सरकार की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में कहा गया है कि टेलीग्राम ऐप नया डार्क वेब बन गई है. अपराधी, साइबर फ्रॉडस्टर, कट्टरपंथी समूह और दूसरे खतरनाक तत्व कानून की नजरों से बचने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. अब इस प्लेटफॉर्म को कई गैर-कानूनी गतिविधियां चलाने के लिए यूज किया जा रहा है. 

कोर्ट में कैसे पहुंचा यह मामला? 

NEET Re Exam में पेपर लीक की घटना को रोकने के लिए सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर टेंपरेरी बैन लगा दिया है. साथ ही इसके मैसेज एडिटिंग के फीचर को भी 30 जून तक डिसेबल रखने का आदेश दिया है. टेलीग्राम ने इस आदेश को गलत बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. टेलीग्राम के सीईओ ने अपने बयान में कहा था कि सरकार ने पेपर लीक करने वालों की बजाय इस प्लेटफॉर्म के 15 करोड़ यूजर्स को सजा दी है. कंपनी ने राहत की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

सरकार ने लगाए गंभीर आरोप

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने कोर्ट में जमा एफिडेविट में टेलीग्राम पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया है कि यह टेलीग्राम को लीक हुए एग्जाम सर्कुलेट करने, साइबर फ्रॉड,टेररिज्म-लिंक्ड प्रोपेगेंडा, ड्रग ट्रैफिकिंग, फाइनेंस क्राइम और बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेट के लिए यूज किया जा रहा है. अब यह नया डार्क वेब बन गया है. क्रिमिनल्स अब टेलीग्राम की मदद से उन चैनल्स पर लिंक पोस्ट कर रहे हैं, जो डार्क वेब फोरम से जुड़े हुए हैं. इस कारण एजेंसियों के लिए अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो गया है. इसके प्राइवेसी और गुमनामी वाले फीचर्स के कारण यह क्रिमिनल नेटवर्क की पसंद बना हुआ है.

प्राइवेसी फीचर से पहचान छिपे रहे अपराधी- सरकार

सरकार ने कहा है कि टेलीग्राम पर यूजर फोन नंबर और अपनी आईडी को हाइड कर सकते हैं, जिससे जांचकर्ताओं के लिए अकाउंट चलाने वालों की असली पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसके प्राइवेसी फीचर के कारण यह प्लेटफॉर्म ड्रग ट्रैफिकिंग, साइबर क्राइम, टेररिज्म, चाइल्ड एक्सप्लोएटेशन और फ्रॉड आदि में यूज किया जा रहा है. सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए हिंसक कट्टरपंथी कंटेट और आतंकी संगठनों से जुड़ा मैटेरियल भी फैलाया जा रहा है.

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