Social Media पर हर स्क्रॉल के साथ कम हो रही है आपकी खुशी, नई रिपोर्ट में हुआ डराने वाला खुलासा


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  • सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
  • पश्चिमी देशों में किशोरियां और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
  • सोशल मीडिया की लत से तनाव और नकारात्मकता बढ़ रही है।
  • उपयोगकर्ताओं को समय सीमा तय कर बाहर संवाद करना चाहिए।

Social Media Danger: Doom-scrolling से आज हर कोई परेशान है. लोग सिर्फ 5 मिनट फोन यूज करने का मन बनाकर बैठते हैं और कब घंटे बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता. ज्यादातर मामलों में लोग डूमस्क्रॉलिंग के बाद पहले से ज्यादा खराब फील करते है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो बता दें कि आप अकेले नहीं है. दुनियाभर में करोड़ों लोग इससे परेशान है और अब इसके साइंटिफिक रीजन भी सामने आ गए हैं. एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल लोगों में नेगेटिविटी भर रहा है और इससे उनकी वेल-बीइंग पर बुरा असर पड़ रहा है.

ऐसे काम खराब कर रहा है सोशल मीडिया

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेल-बीइंग रिसर्च सेंटर की तरफ से पब्लिश की गई वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और लोगों की खुशियों पर इसके असर के बीच सीधा लिंक बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया जवान लोगों को और खासकर पश्चिमी देशों की लड़कियों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है. रिसर्चर का कहना है कि थोड़ी देर तक सोशल मीडिया को यूज करना ठीक है. इसका मतलब है कि आप दुनिया से कनेक्ट कर रहे हैं, लेकिन जितना ज्यादा समय इस पर बीतता जाएगा, यह यूजर की सेहत के लिए उतना ही खराब है. 

नया नशा बन रहा है सोशल मीडिया

रिपोर्ट के मुताबिक, यूके, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाडा आदि देशों में 25 से कम उम्र के लोगों की सेहत में पिछले दशक की तुलना में काफी गिरावट आई है और इसी दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ा है. रिसर्चर के मुताबिक, जवान लोग अब पिछली जनरेशन की तरह स्मोकिंग और ड्रिंकिंग नहीं कर रहे, लेकिन उनके पास सोशल मीडिया है, जिससे वो पूरे दिन चिपके रहते हैं. कई ऐसी स्टडीज सामने आ चुकी हैं, जिनमें बताया गया है कि सोशल मीडिया की लत और डूम-स्क्रॉलिंग के कारण लोगों की मेंटल हेल्थ खराब हो रही है और यंग यूजर्स में स्ट्रेस और नेगेटिविटी बढ़ती जा रही है. 

क्या है बचाव का तरीका?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिसर्चर का कहना है कि सरकारें इस मामले में कुछ नहीं कर रही हैं और कंपनियां लोगों को अपने प्लेटफॉर्म्स यूज करने से रोकेंगे नहीं. ऐसे में सारी जिम्मेदारी यूजर के ऊपर आ जाती है. लोगों को सोशल मीडिया से चिपने रहने की बजाय बाहर जाकर लोगों से बातचीत करनी चाहिए. इसके अलावा ज्यादा समय खराब करने से रोकने के लिए टाइम लिमिट का भी सहारा लिया जा सकता है.

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