AI Training के लिए घरों में रिकॉर्डिंग! Pronto के कैमरों ने बढ़ाई प्राइवेसी की चिंता

मेटा के स्मार्ट ग्लासेस हाल ही में चर्चा में हैं, जिन्हें भविष्य के रोबोट वर्कफोर्स को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी बीच भारत की एक स्टार्टअप कंपनी Pronto भी सुर्खियों में आ गई है, जिसने अपने कर्मचारियों को ऐसे कैमरे उपलब्ध कराए हैं जो घर के अंदर किए गए काम को रिकॉर्ड करते हैं. यह पूरा मामला AI ट्रेनिंग और डेटा कलेक्शन के नए और विवादित तरीके की ओर इशारा करता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिर Pronto अपने कर्मचारियों को घरों में काम करने के लिए भेजता है, जहां वे सफाई, बर्तन धोने और दूसरे घरेलू काम करते हैं. इस दौरान उनके साथ एक कैमरा लगा होता है जो हर एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है. कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य ग्राहकों में भरोसा बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि घर में काम करने वाला व्यक्ति सुरक्षित और सही तरीके से काम कर रहा है.

भविष्य में काम करने के लिए आ सकता है रोबोट
लेकिन इसी के साथ बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह रिकॉर्ड किया गया डेटा आखिर इस्तेमाल कहां हो रहा है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस वीडियो डेटा का इस्तेमाल भविष्य में AI मॉडल्स और ह्यूमनॉइड रोबोट्स को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता है. यानी जो कर्मचारी आज यह काम कर रहे हैं, वही डेटा भविष्य में उन रोबोट्स को सिखाएगा जो संभवतः उनकी जगह काम कर सकते हैं.

यह स्थिति AI के ‘job disruption’ प्रभाव को और भी गंभीर बनाती है, जहां तकनीक न केवल काम करने के तरीके बदल रही है बल्कि कई मामलों में मानव श्रम को भी चुनौती दे रही है. जैसे-जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट्स का विकास तेज हो रहा है, कंपनियां ऐसे डेटा की तलाश में हैं जो उन्हें वास्तविक दुनिया के कामों को समझने और दोहराने में मदद कर सके.

प्राइवेसी पर खतरा?
हालांकि इस पूरे मामले ने प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं. Entracker की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तरह की रिकॉर्डिंग से ग्राहकों के घरों की गोपनीयता पर खतरा हो सकता है. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह डेटा किस स्तर पर स्टोर किया जाता है और किस तरह से AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल होता है.

वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों ने खुद को इस तरह की प्रैक्टिस से अलग रखा है. Urban Company और Snabbit जैसी कंपनियों ने साफ कहा है कि वे अपने ग्राहकों के घरों में किसी भी तरह की AI ट्रेनिंग या रिकॉर्डिंग सिस्टम का उपयोग नहीं करती हैं. स्नैबिट के फाउंडर ने X (Twitter) पर यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक को समझना और उसे ग्राहकों के घर में लागू करना दो अलग बातें हैं.

ये मामला दिखाता है कि AI और रोबोटिक्स का भविष्य जितना रोमांचक है, उतना ही जटिल और संवेदनशील भी है. एक तरफ जहां यह तकनीक जीवन को आसान बनाने का वादा करती है, वहीं दूसरी तरफ ये प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों को भी सामने लाती है. आने वाले समय में इस तरह की तकनीकों पर सख्त नियम और पारदर्शिता की जरूरत और भी बढ़ सकती है.