टेक कंपनी मेटा ने बड़ा फैसला लेते हुए Instagram के डायरेक्ट मैसेज (DMs) में मौजूद एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर को हटाने की घोषणा की है. कंपनी के मुताबिक ये फीचर 8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर उपलब्ध नहीं रहेगा. मेटा ने अपनी सपोर्ट पेज अपडेट में बताया कि यह फीचर बहुत कम यूजर्स इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए इसे बंद करने का फैसला लिया गया है.
इंस्टाग्राम में कैसे काम करता था Encryption- वॉट्सऐप की तरह इंस्टाग्राम पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से चालू नहीं था. इसे सिर्फ कुछ क्षेत्रों में उपलब्ध कराया गया था और यूजर्स को इसे हर चैट के लिए मैन्युअली ऑन करना पड़ता था.
मेटा के प्रवक्ता ने बताया कि बहुत कम लोग इस फीचर का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए कंपनी इसे हटाने जा रही है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘बहुत कम लोग इंस्टाग्राम DMs में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए आने वाले महीनों में यह ऑप्शन हटा दिया जाएगा. अगर कोई यूजर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग जारी रखना चाहता है तो वह वॉट्सऐप का उपयोग कर सकता है.’
मैसेंजर पर क्या होगा? मेटा ने ये क्लियर नहीं किया है कि मैसेंजर में भी कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं. कंपनी ने 2023 में मैसेंजर पर डिफॉल्ट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू करना शुरू किया था और अभी भी इस फीचर को और सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया जारी है.
मेटा की एन्क्रिप्शन पॉलिसी- मेटा ने सबसे पहले 2016 में वॉट्सऐप पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू किया था. बाद में 2019 में कंपनी के CEO मार्क जकरबर्ग ने घोषणा की थी कि कंपनी अपने सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी-फोकस्ड स्ट्रेटेजी अपनाएगी.
हालांकि इस योजना को लागू करने में समय लगा. 2021 में मेटा के सेफ्टी हेड ने कहा था कि कंपनी एन्क्रिप्शन रोलआउट को 2023 तक टाल रही है ताकि सुरक्षा से जुड़े बेहतर उपाय तैयार किए जा सकें.
Encryption पर विवाद क्यों? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लंबे समय से विवाद का विषय रहा है. कई सरकारें और चाइल्ड सेफ्टी संगठन मानते हैं कि यह तकनीक ऑनलाइन अपराधियों और बच्चों को निशाना बनाने वाले लोगों को पकड़ना कठिन बना सकती है.
हाल ही में अमेरिका के New Mexico में चल रहे एक चाइल्ड सेफ्टी ट्रायल के दौरान मेटा के इंटरनल डॉक्यूमेंट भी अदालत में पेश किए गए हैं. इन दस्तावेजों में कंपनी के अधिकारियों के बीच यूजर प्राइवेसी और ऑनलाइन सुरक्षा के संतुलन पर चर्चा का उल्लेख बताया गया है.
ट्रायल में दिए गए बयान में मार्क जकरबर्ग ने कहा कि सुरक्षा चिंताओं के कारण मैसेंजर पर एन्क्रिप्शन लागू करने में समय लगा. उनके अनुसार मजबूत एन्क्रिप्शन आम तौर पर यूजर्स और सुरक्षा विशेषज्ञों दोनों के लिए सकारात्मक माना जाता है.