भारत सरकार बच्चों और किशोरों (माइनर्स) के सोशल मीडिया उपयोग को सुरक्षित और नियंत्रित करने के लिए एक नई नीति पर काम कर रही है। पूरी तरह से बैन लगाने के बजाय सरकार अब उम्र के आधार पर चरणबद्ध (tier-based) एक्सेस सिस्टम लागू करने की दिशा में विचार कर रही है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया के जोखिमों से बचाना है, साथ ही उनकी ऑनलाइन पहुंच को पूरी तरह खत्म भी नहीं करना।
क्या हो सकता है नया नियम?
सरकार, टेक कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसे कई उपायों पर चर्चा कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
- पेरेंटल कंट्रोल को मजबूत बनाना
- स्क्रीन टाइम लिमिट तय करना
- कुछ फीचर्स (जैसे लाइव चैट, डायरेक्ट मैसेज) पर उम्र के अनुसार रोक
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाना
- यूजर्स की उम्र सत्यापन (Age Verification) को सख्त बनाना
उम्र सीमा पर अभी फैसला बाकी
अभी तक सरकार ने न्यूनतम उम्र तय नहीं की है, लेकिन चर्चा में ये विकल्प शामिल हैं:
- 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सीमित या प्रतिबंधित एक्सेस
- 16 या 18 साल से ऊपर के यूजर्स के लिए अधिक स्वतंत्रता
अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय ली जा रही है।
मौजूदा सिस्टम क्यों है कमजोर?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि:
- बच्चे आसानी से गलत उम्र डालकर अकाउंट बना लेते हैं
- ग्रामीण और निम्न आय वाले परिवारों में एक ही मोबाइल कई लोग इस्तेमाल करते हैं
- प्रभावी Age Verification सिस्टम की कमी है
सरकार का मुख्य फोकस क्या है?
सरकार का उद्देश्य साफ है:
✔️ बच्चों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखना
✔️ अभिभावकों को ज्यादा नियंत्रण देना
✔️ टेक कंपनियों को जिम्मेदार बनाना
✔️ बिना पूरी तरह बैन किए संतुलित समाधान तैयार करना
नियम लागू करने में क्या होंगी चुनौतियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों को लागू करना आसान नहीं होगा:
- प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं
- कुछ बच्चों का डिजिटल एक्सेस सीमित हो सकता है
- शेयर किए गए डिवाइस (एक फोन, कई यूजर्स) में पहचान मुश्किल
- कंपनियों को अपनी नीतियां और टेक्नोलॉजी बदलनी पड़ेगी
आगे क्या होगा?
सरकार अभी कई मॉडल्स पर विचार कर रही है, जिनमें उम्र के अनुसार अलग-अलग प्रतिबंध लगाने का विकल्प प्रमुख है। संभावना है कि इन बदलावों को आईटी नियमों (IT Rules) में संशोधन के जरिए लागू किया जाएगा।
हालांकि, अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। सरकार सभी हितधारकों—टेक कंपनियों, विशेषज्ञों और आम जनता—की राय लेकर ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी।