ग्राउंडसोर्स ने जेमिनी (Gemini) AI मॉडल का उपयोग करके दुनिया भर में दशकों से मौजूद सार्वजनिक रिपोर्ट्स का एनालिसिस किया. इस प्रक्रिया के दौरान 150 से अधिक देशों में हुई करीब 26 लाख से ज्यादा ऐतिहासिक बाढ़ घटनाओं की पहचान की गई.
इसके बाद गूगल मैप्स (Google Maps) की मदद से हर घटना की सटीक भौगोलिक सीमा तय की गई, ताकि यह समझा जा सके कि किन क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की घटनाएं अधिक हुई हैं. इस तरह तैयार किए गए बड़े डेटासेट के आधार पर एक नया AI मॉडल सिखाया गया. यह मॉडल अब शहरी क्षेत्रों में संभावित फ्लैश फ्लड की 24 घंटे पहले तक भविष्यवाणी करने की दिशा में काफी बेहतर तरीके से बढ़ रहा है.
कहां मिलेगी फ्लड की जानकारी?
गूगल ने इन नए पूर्वानुमानों को अपने प्लेटफॉर्म फ्लड हब (Flood Hub) में शामिल किया है. यह प्लेटफॉर्म पहले से ही दुनिया भर में बड़ी नदी से आने वाली बाढ़ (riverine floods) की चेतावनी देता है. मौजूदा समय में यह सिस्टम 150 से अधिक देशों में लगभग 2 अरब लोगों को संभावित नदी बाढ़ के बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध कराता है. अब इसमें शहरी फ्लैश फ्लड के पूर्वानुमान जुड़ने से इसकी क्षमता और भी बढ़ गई है. इसका मतलब है कि अब कई शहरों को आपदा आने से पहले तैयारी करने का अधिक समय मिल सकेगा.
केवल गूगल तक सीमित नहीं रहेगा डेटाबेस
ग्राउंडसोर्स से तैयार हुआ यह विशाल डेटासेट केवल गूगल तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी ने इसे शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए एक ओपन-सोर्स बेंचमार्क के रूप में उपलब्ध कराया है. खासतौर पर उन शहरी क्षेत्रों के लिए यह बेहद उपयोगी साबित होगा, जहां पहले फ्लैश फ्लड का ऐतिहासिक डेटा लगभग न के बराबर था. इससे वैज्ञानिक बेहतर मॉडल तैयार कर पाएंगे और आपदा प्रबंधन में नई तकनीकें डेवलप कर सकेंगे.
अन्य आपदाओं की भविष्यवाणी में भी होगा इस्तेमाल
गूगल का कहना है कि ग्राउंडसोर्स के AI-आधारित सिस्टम को केवल बाढ़ तक सीमित नहीं रखा जाएगा. भविष्य में इसका उपयोग लैंडस्लाइड, हीटवेव जैसी अन्य प्राकृतिक आपदाओं के डेटा तैयार करने में भी किया जा सकता है.
दुनियाभर से प्राप्त विश्वसनीय सार्वजनिक रिपोर्ट्स को एक बड़े डेटासेट में बदलकर वैज्ञानिक बेहतर पूर्वानुमान मॉडल बना पाएंगे. कंपनी का लक्ष्य है कि भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा से पहले लोगों को पर्याप्त चेतावनी मिल सके और नुकसान को कम किया जा सके.