नई दिल्ली. महानगरों और बड़े शहरों में गाड़ी लेकर निकलना जितना बड़ा सिरदर्द है, उससे कहीं बड़ी आफत है मंजिल पर पहुंचकर गाड़ी खड़ी करने के लिए सुरक्षित जगह ढूंढना. अक्सर लोग ऑफिस, मॉल या बाजारों के चक्कर सिर्फ इसलिए काटते रहते हैं क्योंकि उन्हें पार्किंग नहीं मिलती. इससे न सिर्फ समय बर्बाद होता है, बल्कि सड़कों पर बेवजह जाम भी लगता है. लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) के तहत देश के प्रमुख शहरों को अब ‘स्मार्ट पार्किंग’ (Smart Parking System) से लैस किया जा रहा है. इस आधुनिक व्यवस्था के तहत मोबाइल ऐप के जरिए लोग घर से निकलने से पहले ही पार्किंग स्पेस बुक कर सकते हैं.
कैसे काम करती है यह स्मार्ट पार्किंग?
इस पूरी व्यवस्था के पीछे सेंसर आधारित तकनीक (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम करती है. शहर के सभी प्रमुख पार्किंग स्थलों पर स्मार्ट सेंसर्स लगाए गए हैं. ये सेंसर सीधे केंद्रीय सर्वर और मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं. जैसे ही कोई गाड़ी पार्किंग स्लॉट से हटती है, ऐप पर वह जगह ‘खाली’ दिखाने लगती है.
जाम और पार्किंग के झंझट से मिलेगी मुक्ति
आप अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचने से आधे घंटे या एक घंटे पहले ही उस इलाके की पार्किंग चेक कर सकते हैं और ऑनलाइन भुगतान करके अपने वाहन के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं. जब तक आप वहां पहुंचेंगे, वह जगह आपके लिए रिजर्व रहेगी. इस मोबाइल ऐप के आने से शहरों की दो सबसे बड़ी समस्याओं जाम और पार्किंग का समाधान एक साथ होगा.
समय और ईंधन की बचत
रिसर्च बताते हैं कि शहरों में करीब 30% ट्रैफिक जाम सिर्फ उन गाड़ियों की वजह से लगता है जो पार्किंग की तलाश में सड़कों पर रेंग रही होती हैं. जब लोगों को पहले से पता होगा कि उनकी जगह कहां बुक है, तो वे सीधे वहीं जाएंगे. इससे ईंधन बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा.
सड़क पर अवैध पार्किंग का खात्मा
जगह न मिलने पर लोग अक्सर सड़कों के किनारे गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे बॉटलनेक (जाम) की स्थिति बनती है. स्मार्ट पार्किंग ऐप से अवैध पार्किंग की आदत पर लगाम लगेगी. ऐप के जरिए डिजिटल पेमेंट होने से पार्किंग माफियाओं और ओवरचार्जिंग की समस्या का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा.