तो इसलिए भारत के आगे हाथ जोड़े खड़ी टेक कंपनियां, सरकार के इन आंकड़ों में छुपी वजह


नई दिल्ली. हर बड़ी टेक कंपनी भारत में अपना प्रोडक्ट लॉन्च करना चाहती है. हर सोशल मीडिया कंपनी से लेकर सोशल मीडिया के स्टार तक भारत के लोगों को रिझाने में लगे रहते हैं. भारतीयों के आगे ये पलक पावड़े बिछाना बेवजह नहीं है. केंद्र सरकार ने संसद में एक आंकड़ा दिया है जो बता रहा है कि भारत की जनसंख्या कैसे उसके लिए ताकत बनती जा रही है. भारत में डिजिटल क्रांति ने लगभग हरेक के हाथ में फोन पहुंचा दिया है. यही वजह है कि टेक कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मार्केट बन चुका है जिसे नजरअंदाज करना अब नामुमकिन है. लोकसभा में सरकार ने बताया कि अब भारत में 133 करोड़ से ज्यादा टेलीफोन कनेक्शन और 109 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य हर नागरिक तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाना, डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है.

सरकार के अनुसार, डिजिटल पेमेंट से लेकर ऑनलाइन हेल्थ सर्विस, डिजिटल पहचान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक लगभग हर क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार हुआ है. सरकार का कहना है कि अब अगला लक्ष्य सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम, डेटा सुरक्षा और AI आधारित टेक्नोलॉजी को मजबूत करना है. सरकार के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश में टेलीफोन कनेक्शन बढ़कर 133 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं, जबकि डिजिटल इंडिया शुरू होने के समय यह संख्या करीब 93.3 करोड़ थी. इसी तरह इंटरनेट सब्सक्राइबर 25.15 करोड़ से बढ़कर 109.27 करोड़ पहुंच गए हैं. ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत जून 2026 तक 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है. वहीं डिजिटल भारत निधि योजना के तहत 24,784 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. मोबाइल इंटरनेट भी पहले के मुकाबले काफी सस्ता हुआ है. 2014 में जहां 1 जीबी डेटा की औसत कीमत करीब 269 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है.

UPI और आधार ने बदली डिजिटल अर्थव्यवस्था

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं.

  • आधार के तहत 144 करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटल पहचान मिल चुकी है.
  • DBT के जरिए 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं में 52 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे जा चुके हैं.
  • UPI से 55.49 करोड़ उपभोक्ता, 6.5 करोड़ व्यापारी और 731 बैंक जुड़े हैं. सरकार के अनुसार भारत के 85 फीसदी डिजिटल भुगतान और दुनिया के करीब 50 फीसदी रियल टाइम डिजिटल भुगतान UPI के जरिए होते हैं.
  • डिजिलॉकर के 71.66 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत यूजर्स हैं.
    ई संजीवनी प्लेटफॉर्म के जरिए 48 करोड़ से अधिक मरीजों को ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं मिल चुकी हैं.
  • देशभर में 5.01 लाख कॉमन सर्विस सेंटर काम कर रहे हैं.

डिजिटल स्किलिंग और रोजगार पर जोर

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत 6.39 करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया है. FutureSkills Prime प्लेटफॉर्म पर 34 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराया है और 23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारतीय IT और ITeS उद्योग का राजस्व 283 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. वहीं देश में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर लगभग 26 लाख पेशेवरों को रोजगार दे रहे हैं.

स्टार्टअप और AI पर बड़ा दांव

टेक्निकल इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए देश में 73 STPI सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें 65 टियर 2 और टियर 3 शहरों में हैं. GENESIS योजना के तहत 1,600 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने बताया कि IndiaAI Mission के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके तहत स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल, AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, AI स्किलिंग, स्टार्टअप फंडिंग और सुरक्षित AI इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है.

साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर बढ़ा फोकस

सरकार का कहना है कि डिजिटल विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है. इसके लिए CERT In, National Cyber Coordination Centre, Cyber Swachhta Kendra, I4C और NCIIPC जैसी संस्थाओं के जरिए साइबर हमलों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने की व्यवस्था मजबूत की गई है. साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और DPDP Rules 2025 के जरिए नागरिकों के डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है. इसके तहत डेटा प्रोसेसिंग के लिए स्पष्ट सहमति, डेटा सुरक्षा के नियम और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं. सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निवेश बढ़ाकर भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने का लक्ष्य है.



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