दिल्ली में शर्मनाक हालत! 10 साल से मांग के बावजूद बुराड़ी में नहीं बनी पक्की पुलिया, लोग परेशान

 दिल्ली। देश की राजधानी की चमक-दमक में कई ऐसे इलाके आमतौर पर नजर नहीं आते, जहां आजादी के 78 साल बाद भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। बुराड़ी भी ऐसा ही एक इलाका है, जहां लकड़ी के पटरे जोड़कर बनाई गई पुलिया से नाला पार कर बच्चे स्कूल जाते हैं। करीब 15 फीट चौड़ा व 10 फीट गहरा यह नाला गंदगी से अटा पड़ा है, जिसकी लंबे समय से सफाई भी नहीं हुई है।

पुलिया पार करते समय लकड़ी के पटरे हिलते हैं, जिससे बच्चों के नाले में गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों की मानें तो उन्होंने पिछले दस वर्ष में शासन-प्रशासन के तमाम बड़े अधिकारियों से लेकर हर जनप्रतिनिधि तक इस समस्या को उठाया, लेकिन उनकी परेशानी अब भी बनी हुई है।

आम लोग भी नाला पार करने के लिए करते हैं पुल का इस्तेमाल

उनकी मांग है कि सिंचाई विभाग से जल्द से जल्द नाले पर पक्की पुलिया का निर्माण करवाए। वैसे तो आम लोग भी नाला पार करने के लिए इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनको अपने बच्चों की अधिक चिंता रहती है। उनका कहना है कि बड़े लोग तो किसी तरह इस पुलिया को पार कर लेते हैं, लेकिन उन्हें अपने बच्चों को लेकर डर लगा रहता है। जब तक वे स्कूल से वापस घर नहीं आ जाते, तब तक वे परेशान रहते हैं।

इस नाले के किनारे कई जगहों पर सुरक्षा दीवार भी नहीं

सिंचाई विभाग से कई बार गुहार लगाने के बाद जब कुछ नहीं हुआ तो तीन साल पहले स्वरूप विहार के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपने पैसों से लकड़ी की इस पुलिया का निर्माण करवाया था। तभी से लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह पुलिया भी अब जर्जर होने लगी है। इससे पहले लोगों को काफी घूमकर दूसरी पुलिया से उस पार जाना पड़ता था। करीब आठ किलोमीटर लंबे इस नाले के किनारे कई जगहों पर सुरक्षा दीवार भी नहीं है। जहां दीवार है, वहां उसकी ऊंचाई भी काफी कम है।

इस नाले के डेढ़-दो किलोमीटर हिस्से में लकड़ी की इस पुलिया के अलावा लोगों ने नाला पार करने के लिए उस पर सीमेंट के खंभे रख दिए हैं। इनकी चौड़ाई बहुत कम है, जिससे बच्चों के लिए इनके ऊपर से नाला पार करना बहुत जोखिम भरा है।

वर्षों से चार जगहों पर पुलिया बनाने की हो रही मांग

करीब आठ किलोमीटर लंबे नाले के दोनों ओर छह कालोनियां बसी हैं। यहां के लोग कई वर्ष से इस नाले पर चार जगहों पर पक्की पुलिया बनवाने की मांग कर रहे हैं।