- AI एजेंट्स इंसानों की तरह यूजर की जरूरतें समझकर फैसले लेंगे।
AI Apps: दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एक तरफ AI को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन की बड़ी टेक कंपनियां ऐसे स्मार्ट AI ऐप्स तैयार कर रही हैं जो लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को खुद संभाल सकें. अब ये AI ऐप्स केवल सुझाव देने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि यूजर्स की तरफ से सामान चुनने, ऑर्डर करने और पेमेंट करने जैसे काम भी खुद करने लगे हैं.
चीन में AI बना लोगों का डिजिटल असिस्टेंट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की दिग्गज कंपनियां जैसे Alibaba, Tencent और ByteDance अपने सुपर-ऐप्स को AI तकनीक से और ज्यादा स्मार्ट बना रही हैं. इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म जैसे Taobao, WeChat और Douyin अब ऐसे AI एजेंट्स पर काम कर रहे हैं जो इंसानों की तरह फैसले लेने लगे हैं.
अब चीन के बड़े शहरों में लोग केवल आवाज या टेक्स्ट कमांड देकर खाना, कॉफी, टैक्सी या शॉपिंग का सामान मंगवा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि एक AI असिस्टेंट ने यूजर के लिए खुद रोज पेटल विनेगर फ्लेवर वाली खास कॉफी चुनकर डिलीवर भी कर दी.
क्या होते हैं AI एजेंट्स?
AI एजेंट्स ऐसे स्मार्ट टूल्स होते हैं जो कम से कम इंसानी दखल के साथ काम कर सकते हैं. ये यूजर की पसंद, जरूरत और आदतों को समझकर खुद फैसले लेने लगते हैं. आसान भाषा में कहें तो आने वाले समय में AI केवल सवालों के जवाब नहीं देगा बल्कि आपके लिए ऑनलाइन खरीदारी, पेमेंट और कई जरूरी फैसले भी करेगा.
बताया जा रहा है कि चीन में 60 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में AI एजेंट सेवाओं का इस्तेमाल कर चुके हैं. इससे साफ है कि वहां AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है.
चीन के इंटरनेट की शुरुआत से अब तक का सफर
पिछले दो दशकों में चीन का इंटरनेट काफी बदल चुका है. शुरुआती दौर में लोग वेब सर्च के लिए Baidu पर निर्भर थे, खासकर तब जब Google ने चीन से अपना कारोबार सीमित कर लिया था. इसके बाद स्मार्टफोन युग आया, जहां लोगों ने ऐसे सुपर-ऐप्स का इस्तेमाल शुरू किया जिनमें चैटिंग, पेमेंट, शॉपिंग और एंटरटेनमेंट सबकुछ एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलने लगा. आज WeChat, Taobao और Douyin चीन की डिजिटल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुके हैं.
क्या भारत में भी आएंगे ऐसे सुपर-ऐप्स?
भारत में फिलहाल चीन जैसा कोई एक बड़ा सुपर-ऐप मौजूद नहीं है. हालांकि कई भारतीय कंपनियां पेमेंट, शॉपिंग, ट्रैवल, मनोरंजन और दूसरी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म में जोड़ने की कोशिश कर रही हैं.
फिर भी भारत अभी AI एजेंट्स के मामले में चीन से पीछे माना जा रहा है. लेकिन आने वाले कुछ सालों में तस्वीर बदल सकती है. जैसे-जैसे कंपनियां AI असिस्टेंट्स को अपने ऐप्स और सेवाओं में जोड़ेंगी, वैसे-वैसे भारत में भी AI आधारित सुपर-ऐप इकोसिस्टम देखने को मिल सकता है.
भविष्य में AI करेगा सबकुछ कनेक्ट
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में मुकाबला एक ऐप में सबकुछ का नहीं होगा बल्कि एक AI असिस्टेंट का होगा जो चुपचाप बैकग्राउंड में रहकर आपकी जरूरतों को समझेगा और अलग-अलग सेवाओं को आपस में जोड़कर काम करेगा. यानी भविष्य में मोबाइल ऐप्स से ज्यादा ताकत AI असिस्टेंट्स के हाथ में हो सकती है.
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