आजकल ऑनलाइन शॉपिंग करना बहुत आसान और मजेदार हो गया है. लेकिन 80% या 90% डिस्काउंट देखकर अगर आप जल्दी में खरीदारी कर लेते हैं, तो आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है. धोखेबाज फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को लालच देते हैं. ये साइट्स असली दुकानों जैसी दिखती हैं, लेकिन आपका क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का डेटा चुरा लेती हैं. सामान कभी नहीं आता और पैसे गायब हो जाते हैं.
फर्जी वेबसाइट्स मुख्य रूप से भारी डिस्काउंट का जाल बिछाती हैं. जैसे लेटेस्ट मोबाइल 70-80% सस्ता, ब्रांडेड बैग आधे दाम पर या महंगे जूते सिर्फ कुछ सौ रुपये में. ये ऑफर ‘बहुत अच्छे लगते हैं तो सच नहीं होते’. असली कंपनियां इतना डिस्काउंट शायद ही देती हों. धोखेबाज जानते हैं कि लालच में लोग बिना सोचे पेमेंट कर देते हैं.
फर्जी वेबसाइट की पहचान करने के लिए सबसे पहले URL को ध्यान से चेक करें. असली अमेज़न की साइट अमेज़न.इन होती है, लेकिन फर्जी वेबसाइट अमेज़न-सेल.इन, amaz0nshop.com या flipkart-offers.net जैसी हो सकती है. छोटे-छोटे अक्षर बदलकर या .net, .top, .xyz जैसे एक्सटेंशन लगाकर बनाई जाती हैं. हमेशा https:// देखें और एड्रेस बार में ताला का निशान (padlock) हो. अगर https नहीं है तो तुरंत बंद कर दें.
दूसरी ट्रिक- वेबसाइट का डिजाइन देखें. फर्जी साइट्स पर फोटो धुंधली होती हैं, भाषा में गलतियां होती हैं और वाक्य अजीब लगते हैं. असली साइट्स पर प्रोफेशनल लुक, साफ फोटो और सही हिंदी-अंग्रेजी होती है.
तीसरी जरूरी बात- संपर्क जानकारी. असली वेबसाइट पर फोन नंबर, ईमेल, पूरा पता और कस्टमर केयर डिटेल्स साफ दिखती हैं. फर्जी साइट्स पर ये नहीं होतीं या सिर्फ WhatsApp नंबर होता है. ‘About Us’ पेज भी खाली या कॉपी-पेस्ट किया हुआ लगता है.
चौथी चेतावनी- जल्दबाजी का दबाव. साइट पर टाइमर चल रहा हो जैसे ‘सिर्फ 2 घंटे बाकी’ या ‘केवल 1 पीस बचा है’. ये ट्रिक आपको बिना सोचे खरीदने के लिए मजबूर करती है. असली सेल में भी ऐसा दबाव नहीं होता. रिव्यूज भी चेक करें. अगर सभी रिव्यूज बहुत अच्छे हैं और एक जैसे लगते हैं, तो सावधान रहें.
गूगल पर साइट का नाम सर्च करके ‘scam’ या ‘fraud’ लगाकर देखें. पुरानी साइट्स पर रियल रिव्यूज मिलेंगे.
अपने बैंक अकाउंट को बचाने के लिए कुछ आसान ट्रिक्स अपनाएं:
- हमेशा आधिकारिक ऐप या जाना-पहचाना वेबसाइट से खरीदें.
- क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करें (डेबिट से बेहतर, क्योंकि विवाद आसान).
- COD (Cash on Delivery) चुनें जब तक साइट पर भरोसा न हो.
- छोटी रकम से टेस्ट करें.
- वीपीएन या एंटीवायरस का इस्तेमाल करें.
अगर आपको शक हो तो खरीदारी न करें. बेहतर है थोड़ा महंगा पड़े लेकिन सुरक्षित रहे. भारत में हर साल हजारों लोग ऐसे फर्जी डिस्काउंट के चक्कर में लाखों रुपये गंवा देते हैं.
थोड़ी सी सावधानी से आप अपना पैसा और डेटा बचा सकते हैं. अगली बार जब 80% डिस्काउंट का ऐड दिखे, तो पहले ऊपर बताई ट्रिक्स जरूर चेक करें. ऑनलाइन शॉपिंग का मजा लें, लेकिन लालच में न आएं.