आजकल बिजली के बिल बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. हर कोई चाहता है कि कम बिजली लगे और घर में अच्छी रोशनी हो. led bulb इसी समस्या का आसान और सस्ता हल है. यह पुराने बल्बों से बहुत बेहतर है.सबसे पहले समझते हैं पुराने बल्ब कैसे काम करते हैं.
पुराने बल्ब (जिन्हें हम इंकैंडेसेंट बल्ब कहते हैं) में एक पतली सी तार होती है. बिजली जाने पर यह तार इतनी गर्म हो जाती है कि चमकने लगती है. यानी रोशनी गर्मी से बनती है. लेकिन मुश्किल यह है कि 90% से ज्यादा बिजली सिर्फ गर्मी में बदल जाती है. सिर्फ 5-10% बिजली से रोशनी मिलती है. इसलिए 60 वाट का पुराना बल्ब कम रोशनी देता है और कमरा भी गर्म हो जाता है.
अब एलईडी बल्ब की बात करते हैं
एलईडी का पूरा नाम है- लाइट एमिटिंग डायोड. यह एक छोटा सा चिप होता है. जब बिजली इस चिप से गुजरती है तो इलेक्ट्रॉन बहुत तेजी से चलते हैं. इनके चलने से सीधे रोशनी बन जाती है. इसमें गर्मी बहुत-बहुत कम बनती है. यानी बिजली का 80-90% हिस्सा रोशनी में बदल जाता है. बाकी सिर्फ थोड़ी सी गर्मी बनती है. इसलिए दोनों में बड़ा फर्क है:
| बल्ब का प्रकार | बिजली (वाट) | रोशनी (ल्यूमेन) | गर्मी कितनी? |
| पुराना बल्ब | 60 | 800 | बहुत ज्यादा |
| एलईडी बल्ब | 8-10 | 800-900 | बहुत कम |
देखा? एलईडी 6-8 गुना कम बिजली में उतनी ही या ज्यादा रोशनी देता है.
और भी फायदे हैं:
- बिजली का बिल बहुत कम आता है.
- एक एलईडी बल्ब 10-15 साल तक आसानी से चल सकता है (पुराना बल्ब 1 साल भी नहीं चलता).
- कम गर्मी बनने से कमरा ठंडा रहता है.
- इसमें कोई जहरीला पदार्थ (जैसे पारा) नहीं होता.
- पर्यावरण के लिए भी अच्छा है.
एक छोटा उदाहरण:
मान लो आप रोज शाम 5 घंटे बल्ब जलाते हैं.
- पुराना 60 वाट वाला बल्ब- साल में 100-120 यूनिट बिजली
- 10 वाट वाला एलईडी- साल में सिर्फ 18-20 यूनिट
बहुत बड़ी बचत हुई न?
आज बाजार में छोटे 5 वाट के बल्ब से लेकर बड़े 20-30 वाट के एलईडी मिल जाते हैं. कुछ तो रंग बदलने वाले और मोबाइल से कंट्रोल होने वाले भी हैं. लेकिन असल राज यही है – एलईडी में बिजली सीधे रोशनी बन जाती है, गर्मी लगभग नहीं बनती.
इसलिए कम बिजली में ज्यादा चमक मिलती है.अगर आप अभी भी पुराने बल्ब इस्तेमाल कर रहे हैं तो आज ही एलईडी लगा लीजिए. पैसे बचेंगे, बिजली बचेगी और घर भी ज्यादा रोशन रहेगा.