इस्लामाबाद/गिलगित-बाल्टिस्तान: पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हालिया बयानों के बाद देश में एक नया राजनीतिक और सांप्रदायिक विवाद खड़ा हो गया है। खासतौर पर ईरान और शिया समुदाय को लेकर दिए गए कथित बयानों ने आलोचकों को खुलकर प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है।
ईरान और विदेश नीति पर उठे सवाल
गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष सेंगे सेरिंग ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर तीखी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान का रुख ईरान जैसे देशों के प्रति स्थिर नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक लाभों के अनुसार बदलता रहता है।
इससे क्षेत्रीय भरोसा कमजोर होता है और अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है।
शिया समुदाय को लेकर बयानबाजी पर विवाद
सेरिंग ने एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि सेना प्रमुख के कुछ बयान शिया मुसलमानों को निशाना बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि समाज में धार्मिक विभाजन को भी बढ़ावा देती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी बयानबाजी पाकिस्तान के अंदर बढ़ती असहिष्णुता का संकेत हो सकती है।
सेना पर गंभीर आरोप
सेरिंग ने पाकिस्तान की सेना पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय हितों से ज्यादा रणनीतिक और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देना
- क्षेत्र में उग्रवादी नेटवर्क को समर्थन देने के आरोप
- आम जनता की सुरक्षा और स्थिरता की अनदेखी
उनका कहना है कि इन नीतियों का खामियाजा आम नागरिकों को हिंसा और अस्थिरता के रूप में भुगतना पड़ता है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ती नाराजगी
गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात लगातार तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं।
सेरिंग के अनुसार:
- यह क्षेत्र लंबे समय से विवाद और नियंत्रण की स्थिति में है
- स्थानीय लोग सेना की मौजूदगी का विरोध कर रहे हैं
- नागरिक अधिक राजनीतिक अधिकार और स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं
उन्होंने शिया और सुन्नी समुदायों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग
सेरिंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जाए।
उनका दावा है कि यह क्षेत्र संवैधानिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसकी राजनीतिक स्थिति पर वैश्विक स्तर पर चर्चा जरूरी है।