
NASA permanent Moon base: अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने पोस्ट कर लिखा कि, ‘अब चांद पर सिर्फ उतरना काफी नहीं है, बल्कि वहां टिके रहना है, यही असली लक्ष्य है’। इसके बाद व्हाइट हाउस ने भी यही दोहराते हुए पोस्ट किया। दरअसल, NASA ने 2028 के आखिर से पहले मंगल ग्रह पर स्पेस रिएक्टर 1 फ्रीडम नाम का एक स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करने के प्लान के बारे में बताया है।
वाशिंगटन की मैरी डब्ल्यू जैक्सन बिल्डिंग में एक बड़े पैमाने पर बैठक हुई, जिसमें फोकस रहा कि, अंतरिक्ष यात्रियों की चंद्रमा की सतह पर वापसी की तैयारियों में तेजी लानी होगी, जिसका लक्ष्य साल 2028 तक रखा गया। NASA ने लगभग 20 अरब डॉलर (करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये) की एक बेहद बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थाई इंसानी बेस बनाना है। इसके बाद मंगल ग्रह के लिए परमाणु तकनीक का परीक्षण करना है। अंतरिक्ष मिशनों को छोटे-छोटे मिशनों से आगे बढ़ाकर लंबे समय तक रहने वाले मिशनों में बदलना है।
NASA के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने इसको लेकर पोस्ट लिखा कि, ‘अमेरिकियों को फिर से चांद पर भेजने के लिए, NASA एक दोहराए जाने वाले काम पर फोकस करने वाले तरीके को अपना रहा है। ठीक वैसे ही जैसे हमने अपोलो मिशन के दौरान किया था। हम रॉकेट के डिजाइन को स्टैंडर्ड बना रहे हैं, NASA की विशेषज्ञता को पूरे इंडस्ट्री में शामिल कर रहे हैं और चांद पर लगातार ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए लॉन्च की रफ्तार बढ़ा रहे हैं।’
गहरे अंतरिक्ष की खोज का नया अध्याय शुरू- NASA
NASA के मुताबिक, यह रणनीति चांद पर लगातार ऑपरेशन को सपोर्ट करेगी। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्रीय अंतरिक्ष लक्ष्यों को पूरा करने के लिए NASA परमाणु ऊर्जा और प्रोपल्शन को आगे बढ़ा रही है। जिसमें 2028 में लॉन्च होने वाले SR-1 Freedom मिशन में परमाणु इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन का प्रदर्शन होगा। इसी मिशन के जरिए मंगल ग्रह पर SkyFall हेलीकॉप्टर भेजे जाएंगे। ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर ये क्षमताएं मंगल और उससे आगे के मिशनों के लिए बहुत अहम हैं। NASA का कहना है कि गहरे अंतरिक्ष की खोज का नया अध्याय शुरू हो रहा है।
लंबे समय तक चांद पर रहने की तैयारी
मंगल पर नई पीढ़ी के हेलीकॉप्टर भी भेजे जाएंगे, जो उन इलाकों की खोज करेंगे जहां रोवर नहीं पहुंच सकते। NASA इस योजना में निजी कंपनियों को भी शामिल करने की योजना बना रहा है। आवास और जीवन समर्थन प्रणालियां बनाई जाएंगी, ताकि चालक दल लंबे समय तक चांद के प्रतिकूल वातावरण में रह सके। ये टेक्नोलॉजी मंगल मिशनों के लिए भी टेस्ट होंगी। NASA के मुताबिक, ये कदम 2028 तक चांद पर वापसी की तैयारी तेज करेंगे और अमेरिका को अंतरिक्ष में आगे रखेंगे।