क्या होगा अगर अचानक आपका Google Maps काम करना बंद कर दे, फोन में लोकेशन सिग्नल गायब हो जाए, हवाई जहाज रास्ता भटक जाएं और सैन्य मिसाइलें अपने लक्ष्य तक न पहुंच पाएं? यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है. लेकिन सच यह है कि आज की दुनिया नेविगेशन सैटेलाइट्स पर इतनी ज्यादा निर्भर हो चुकी है कि अगर ये काम करना बंद कर दें, तो मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल सिस्टम तक कई जरूरी चीजें ठप हो सकती हैं. अब सवाल यह उठता है कि ये नेविगेशन सैटेलाइट्स आखिर काम कैसे करते हैं? दुनिया के किन-किन देशों के पास अपना खुद का GPS सिस्टम है? और सबसे अहम बात—इस रेस में भारत कहां खड़ा है?